Wednesday, September 22, 2010

अब खुदा को कहा रहना है ये भी इन्सान बतायेगा!!!

अब भला हम मुर्खो को और क्यो मुर्ख बनाते हो
बता क्यो नही देते कि
मंदिर मे नही मस्जिद मे नही
कही और तशरीफ़ लाते हो
इबादत के नाम पर अब
लोग तुम्हे भुनाने लगे है
पता नही , ना जाने क्यो
लोग तुम्हे मन्दिर और मस्जिद मे चुनवाने लगे है
है कोइ हुकुम या फ़रिश्ता आयेगा
वाह! क्या समय आगया है
अब खुदा को कहा रहना है
ये भी इन्सान बतायेगा!!!
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Sunday, September 5, 2010

मेरे सपने सांस लेने लगे है

अब सोई हुई रातों मे मुझे नींद नही आती
मेरे सपने सांस लेने लगे है
आज फ़िर लगता है ज़िन्दा हुँ मैं
मेरे सपने सांस लेने लगे है
अब मुन्तज़िर नही मैं सुबह होने का
मेरे सपने सांस लेने लगे है
अब फ़लाकत भी सर झुकाने लगी है
मेरे सपने सांस लेने लगे है
अब होंसलों से उडान भरनी है मुझको
मेरे सपने सांस लेने लगे है
अब सोई हुई रातों मे मुझे नींद नही आती
मेरे सपने सांस लेने लगे है
अब सोई हुई रातों मे मुझे.............
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Wednesday, September 1, 2010

माना तू अदीब है मेरी जिन्दगी के अदाब का

"माना तू अदीब है मेरी जिन्दगी के अदाब का
बेहतरीन सजाया है तुने जमाना मेरे ख्वाब का
अब अखतर-शुमारी रह्ती है मेरे साथ, मैं अकेला नही सोता हुँ
यही लगता है अब कोइ अफ़्कार नही तुझे मेरे जजबाद का
माना तू अदीब है मेरी जिन्दगी के अदाब का"
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